एक 12 year का boy अरविंद जिसे tennis खेलना बहुत पसंद था दिल और जान से उसने tennis की practice की | Tennis tournament होने वाले थे जिसे जितना उसने तय किया था | उसकी माँ ने हमेशा उसका साथ दिया दिन रात वो practice करता और माँ उसका ध्यान रखती | बेटे की जीत का सपना माँ की आँखों में भी बस गया था| वह दिन आ गया | सभी players खेलने के लिए ready थे और सभी ने लगभग अरविंद या शायद उससे भी कई ज्यादा hard work किया था जैसा dream अरविंद का था वैसा ही हर player का था | matches हुए अरविंद को जीत हासिल हुई वह बहुत खुश था और ख़ुशी से झूमता हुआ वह अपनी माँ के पास पहुंचा अपनी माँ के हाथों में ट्रॉफी रख कर उससे आशीर्वाद लिया | माँ भी बहुत खुश थी बेटे को गले लगाकर उसने बधाई दी और चुप होकर पास राखी chair पर बैठ गई |

माँ को थोडा उदास देखकर अरविंद से question किया “माँ क्या हुआ आज तो ख़ुशी का पल है पर तू उदास क्यूँ हैं ?” माँ ने कहा “बेटा तू तो जीता है पर में उस लड़के के बारे में सोच रहीं हूँ जो तुझसे हार गया वो भी अभी घर पहुंचा होगा और उदास होगा शायद रो भी रहा हो और उसकी माँ भी दुखी होगी|” यह सुनकर अरविंद चुप होगया और शान्त होकर उसने इस बात को महसूस किया कि हम अपनी जीत में दुसरे की हार को भूल ही जाते है | अरविंद ने इस बात से सबब लिया और अपनी life के हर पहलु में उसने इस बात को लेकर ही decision लिया और एक सफल और संतुष्ट इन्सान बना |

Moral Of The Story:

अगर society में हम एक दुसरे के सुख दुःख का विचार करें तो society में फैला बुराई का कीड़ा मर सकता है | अगर हर माँ अपने बच्चे को बचपन से ही एक अच्छी तालिम दे तो एक स्वच्छ समाज का निर्माण होगा |

हम अक्सर अपनी सफलता में दूसरों को नजरअंदाज कर देते हैं अगर हम सभी को साथ लेकर चले तो समाज में नफ़रत और जलन की भावना कम हो सकती हैं |