यहां शराब पी जाते हैं भगवान
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काल भैरव मंदिर ,उज्जैन
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मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब 8 कि.मी. दूर कालभैरव मंदिर स्थित है। भगवान कालभैरव को प्रसाद के तौर पर केवल शराब ही चढ़ाई जाती है। शराब से भरे प्याले कालभैरव की मूर्ति के मुंह से लगाने पर वह देखते ही देखते खाली हो जाते हैं। मंदिर के बाहर भगवान कालभैरव को चढ़ाने के लिए देसी शराब की आठ से दस दुकानें लगी हैं।
बताया जाता है कि चारों वेदों के रचियता भगवान ब्रह्मा ने जब पांचवें वेद की रचना का फैसला किया, तो उन्हें इस काम से रोकने के लिए देवता भगवान शिव की शरण में गए। ब्रह्मा जी ने उनकी बात नहीं मानी। इस पर शिवजी ने क्रोधित होकर अपने तीसरे नेत्र से बालक बटुक भैरव को प्रकट किया। इस उग्र स्वभाव के बालक ने गुस्से में आकर ब्रह्मा जी का पांचवां मस्तक काट दिया। इसके बाद ब्रह्म हत्या के पाप को दूर करने के लिए वह अनेक स्थानों पर गए। लेकिन उन्हें इससे छुटकारा नहीं मिल पाया। तब भैरव ने भगवान शिव की आराधना की। शिव ने भैरव को बताया कि उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर ओखर श्मशान के पास तपस्या करने से उन्हें इस पाप से मुक्ति मिलेगी। तभी से यहां काल भैरव की पूजा होने का विधान प्रचलित है। कालांतर में यहां भगवान कल भैरव का एक बड़ा मंदिर बन गया। कहा जाता है कि इस अति प्राचीन सिद्ध मंदिर का निर्माण परमार वंश के राजाओं ने करवाया था।…………………………………………………………..हर-हर महादेव

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