What is Love ?????प्यार क्या  है ????????

प्यार क्या है ये अभी तक एक ऐसी पहेली बना हुआ है जिस का कोई भी सही से जबाब नहीं दे पाया है बहुते से लोग प्यार को अँधा कहते है कुछ कहते है की प्यार में दर्दे होता है और कुछ और कहते है जब की प्यार की परिभासा सब लोगो के लिए अलग अलग है

मीरा बाई के लिए भगवन श्री कृष्णा की भक्ति थी तो सुरदास के लिए प्रेम भगवन के भजन गाना था तुलसीदास के लिए भगवन राम के बार में लिखा प्रेम था ,भगवन श्री कृष्ण ने कहा था की प्रेम तो देने में है वो प्रेम जो एक इंसान दूसरे इंसान जानवर को देता है जो की हमको दूसरे लोगो से मिलता है जी में कोई लालच या कोई मोल भाव नहीं होता है प्रेम में पड़ा हुआ इंसान किसी का भी आहित नहीं करता है प्रेम वो है जो ये प्रकृति से हम को मिलता है ये हवा पानी ये फूल पोधे और भी बहुते कुछ जिस का मूल्य प्रकृति हम से कभी नहीं लती है वो तो बस हम को प्रेम देती है और उस के बदले में हम से कुछ भी नहीं लती है!

प्यार जिस ने दो इंसानो को एक साथ किया था । प्यार जिस ने भगवन को धरती पर आने के लिए मजबूर किया था वो प्यार ही था जिस में मजनू ने लेला के लिए पत्थर खाए ,विलियम शेक्सपियर ने कहा था………..

“अगर तुम प्रेम करते हो और तुम्हे कष्ट मिलता है, तो और प्रेम करो।
अगर तुम और प्रेम करते हो और तुम्हे ज्यादा कष्ट मिलने लगता है तो और भी ज्यादा प्रेम करो।
अगर तुम और भी ज्यादा प्रेम करते हो और फिर भी तुम्हे कष्ट मिलता है तो तबतक प्रेम करते रहो जबतक की कष्ट मिलना बंद न हो जाये।” 

“जब उसकी मृत्यु होगी, उसके शरीर को दुकड़ों में कर सितारों की तरह बिखेर देना ताकि वो स्वर्ग को ऐसे जगमगा सके की सारी दुनिया रात से प्रेम करने लगे और भड़कीले सूर्य की पूजा करना छोड़ दे।”

“प्रेम सबसे करें, विश्वास कुछ पर करें और किसी को भी नुकसान न पहुंचाएं।”-विलियम शेक्सपीयर