श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagwat Geeta )एक ऐसा ज्ञान है जो सास्वत है जिस के बिना आज हमारा जीवन कोरे कागज के जैसा होता अगर भगवन श्री कृष्ण ये ज्ञान आपने प्रिये सखा अर्जुन को न देते तो सायद इस गीता ज्ञान  ( geeta Gyan)का रास हम लोगो को नहीं मिल पाता  जैसा की मुझको अपने बुजुर्गो से पाता चला  है की गीता दुनिया की पहली Motivational book मोटिवेशनल पुस्तक है जो की हम को जीवन में आगे बढ़ने  का सन्देश देती है

यहाँ पर में आप लोगो के लिए श्रीमद्भागवत गीत  (Shrimad Bhagwat Geeta )के कुछ मोटिवेशनल सन्देश बता रहा हूँ जिन को आप आपने जीवन में अपना करे जीवन को और भी अधिक सुख और शांति और सफलता प् सकते है श्रीमद्भागवत गीत का घर में डेली पाठ घर में पितृ दोष  (Pitra Dosh )को शांति करता है और हमारे पितरो को शांति और मोक्ष प्रधान करता है

Shrimad Bhagwat Geeta Quotes in Hindi श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल वचन  Part-01 

1. सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और .
     Neither in this world nor elsewhere is there any happiness in store for him who always        doubts.
2. मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है; और लगातार        तुम्हे बस एक साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है.
The power of God is with you at all times; through the activities of mind, senses, breathing, and emoti        ons; and is constantly doing all the work using you as a mere instrument
3.
ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में  देखता है.
The wise sees knowledge and action as one; they see truly.
4. जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है.
    The mind acts like an enemy for those who do not control it.
5.
क्रोध से  भ्रम  पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट         होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है.
   Delusion arises from anger. The mind is bewildered by delusion. Reasoning is destroyed when the            mind is bewildered. One falls down when reasoning is destroyed.
6.
आत्मज्ञान की तलवार से काटकर अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को  अलग कर दो. अनुशाषित रहो . उठो. Sever the       ignorant doubt in your heart with the sword of self-knowledge. Observe your discipline. Arise.
7. अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना निष्क्रियता से बेहतर है.
Perform your obligatory duty, because action is indeed better than inaction.”
8. नर्क के तीन द्वार हैं: वासना, क्रोध और लालच.
Hell has three gates: lust, anger, and greed.
9.
मन  अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है.
The mind is restless and difficult to restrain, but it is subdued by practice.
10.
लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे. सम्मानित व्यक्ति के लिए , अपमान मृत्यु से भी बदतर है.
     People will talk about your disgrace forever. To the honored, dishonor is worse than death.
11.
प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना सभी समान हैं.
To the illumined man or woman, a clod of dirt, a stone, and gold are the same.
12.
मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है.जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.
      Man is made by his belief. As he believes, so he is.

13. इस जीवन में ना कुछ खोता है ना व्यर्थ होता है.
      There is nothing lost or wasted in this life.
14. व्यक्ति जो चाहे बन सकता है यदी वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु  पर लगातार चिंतन करे.
       One can become whatever one wants to be if one constantly contemplates on the object                            of desire w ith faith.
15.
उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, ना कभी था ना कभी होगा.जो वास्तविक है, वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं        किया जा सकता.
     Fear not what is not real, never was and never will be. What is real, always was and cannot be                  destroyed.
16. निर्माण केवल पहले से मौजूद चीजों का प्रक्षेपण है.
Creation is only the projection into form of that which already exists.
17. अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है.
      Unnatural work produces too much stress.
18.
हर व्यक्ति का विश्वास उसकी प्रकृति के अनुसार होता है
     The faith of each is in accordance with one’s own nature.
19.
ज्ञानी व्यक्ति को  कर्म के प्रतिफल की अपेक्षा कर रहे  अज्ञानी व्यक्ति के दीमाग को अस्थिर नहीं करना चाहिए. 

      The wise should not unsettle the mind of the ignorant who is attached to the                              fruits of work.
20. जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है जितना कि मृत होने वाले के लिए जन्म लेना. इसलिए जो                     अपरिहार्य है उस पर शोक मत करो.
      Death is as sure for that which is born, as birth is for that which is dead. Therefore grieve not for               what is inevitable.

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