भाग्य बदलने के लिए शास्त्र कहते हैं सुबह जागते ही करें इनके दर्शन
जब इंसान को किसी अन्य इंसान की अच्छाइयों और उसकी खूबियों के बारे में जानकारी मिले और उन्हें सुनकर उसे खुशी होती है तो वहां प्रेम अपने आप ही प्रकट हो जाता है। प्रेम धीरे-धीरे बढ़े और निरंतर बढ़ता रहे तो हमेशा बना रहता है। प्रेम भीड़ का विषय नहीं है, एकांत की अनुभूति है। प्रेम को कभी भीड़ में महसूस नहीं किया जा सकता। उसे तो सिर्फ एकांत में ही अपने भीतर उतारा जा सकता है। हमारे हाथों का बहुत महत्व है जीवन में। येपुरुषार्थ के प्रतीक हैं।

भाग्य हाथों में ही लिखा होता है और हाथों से ही बदला भी जा सकता है। शास्त्रों ने हाथों का बहुत महत्व बताया है। अहंकार कहता है कि भुजा देखो लेकिन शास्त्र कहता है कि हाथों को देखो कि उन्होंने इस संसार में किया क्या है।

हाथों के आगे के भाग में लक्ष्मी का वास होता है, आखिरी हिस्से में सरस्वती और हथेली के बीच में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण विराजते हैं। अत: सभी को सुबह जागते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करने चाहिएं।

मनुष्य को अपने धर्म और समाज की भाषा को हमेशा आदर देना चाहिए। असत्य और निंदा के समान कोई पाप नहीं हो सकता है। इसलिए जीवन में कभी भी असत्य के सहारे नहीं चलना चाहिए। जहां वस्तु या विचार में जरूरत से अधिक बढ़ौतरी हो जाए वहां नियम लागू करना आवश्यक हो जाता है। जिस प्रकार हर रोज वस्त्र बदलते हैं ताकि शरीर और पहनावा दोनों स्वच्छ दिखें, वैसे ही विचारों में भी शुद्धता लाने का प्रयास करना चाहिए।