वास्तु शास्त्र में फव्वारे का महत्व

पृथ्वी के पांचों तत्वों में संतुलन बनाना जीवन के विकास के लिए आवश्यक रहता है। फव्वारा जल तत्व को बढ़ावा देता या संतुलित करता है। जल का सम्बन्ध हमारे दैनिंक कार्यों से होता है आइये जानते है फव्वारे का महत्व व् उपयोग

इसके अलावा जल का सम्बन्ध कमाई के साथ देखा जाता है।व्यवसाय से धन प्राप्त होता है। विज्ञानं के हिसाब से एक फव्वारा सकारात्मक माहौल भी बनाता है. पानी धन का प्रतीक होता है।

विज्ञानं के हिसाब से चलते हुए पानी का फव्वारा जिस स्थान में रखा होता है वहाँ पर नेगेटिव आयन (negative ions) बड़ा देता व् पॉजिटिव आयन (positive ions) कम कर देता है. नेगेटिव आयन हमारे शरीर के लिए अचे होते है व् हमारे शरीर में ऑक्सीजन व् इम्युनिटी (immunity) बढ़ता है. लेकिन फव्वारा हर जगह या हर दिशा में नही रखा जा सकता। इसको रखने के लिए किसी वास्तु विद सलाह अवश्य ले.

फव्वारे को कैसे उपयोग मे लाये आइए जाने.

व्यक्ति जब तनाव में घर लौटता है तो उसको फव्वारा देखकर सुकून मिलता है। खुशी मिलती है।

अगर आपके पैसे का आवागमन रुक गया है तो भी आप इसे उपयोग मे ला सकते है.

कार्यालय में टेबिल पर फब्वारा कार्य से होने वाले तनाव को कम करता है, और इसके लिए शक्ति को बढ़ावा देता है।

फव्वारा हमेशा उत्तर-पूर्व में रखना चाहिए। यह हमेशा बहता रहना चाहिए। रुका हुआ फव्वारा धन की हानि करता है। लेकिन अगर इस दिशा मे कमरा है तो नही करना चाहिए।

यह मुख्य द्वार के बायीं और रहना चाहिए। मुख्य द्वार के सामने नहीं रहना चाहिए।

फव्वारा में पानी ऊपर की ओर जाना चाहिए और यहां लाइट्स होनी चाहिए। ध्यान रखे की पानी के चलने की आवाज़ भी आनी चाहिए.

फव्वारा कभी भी खराब नहीं रहना चाहिए वरना धन के प्रवाह में कमी आ जाएगी।