वास्तु विचार”

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वास्तु का प्रभाव हर इंसान पर 45% तक पङता है। कारण 33.5% रात के सोने मे बाकी और काम में निकाल देता है। बाकी स्टार+ कर्म+ हमारा भाग्य जो हमारे पूर्व जन्म का पुन्य माना गया पिता स्वरूप है।
आप सुधारे खुद अपना भवन व फैक्ट्री:
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☆कर्ज और गरीबी से तुरंत छुटकारा पाना चाहते है तो, उत्तर-पूर्व की ओर उत्तर-पूर्व की
दीवार का फर्श की तरफ झुकावदार होना बहुत जरूरी है, इससे व्यापार बढ़ता है।
☆धन दौलत की घर में वर्षा न भी हो पर आमदनी जरूर होने लगती है।
☆अधिकांश लोग अपने घर के उत्तर-पूर्व के कोने में आग, चूल्हा, कुकिंग गैस, ज्योत,
हवन आदि की व्यवस्था करते है, जो बिलकुल ही गलत होता है।
☆इस कोने में आग से सम्बन्धित कोई भी काम नहीं होना चाहिए। जेनरेटर, गीजर,
बायलर, भट्टी की गर्मी तक भी इस कोने में नहीं आनी चाहिए। इसको सदा अग्नि कोण
दक्षिण पूर्व में ही रखे। लाभ बङेगा।
☆पानी की टंकी कभी भी अग्नि कोण में न रखे।
☆अपने घर के हर कमरे में उत्तर-पूर्व की ओर ढलान रखें, इससे गयी खुशहाली भी लौट आती है।
☆दक्षिण-पश्चिम भाग की ऊँचाई और उत्तर-पूर्व की ओर का ढलान घर में सुख शान्ति को
बहाल करने वाला होता है।
☆घर के उत्तर-पूर्व में पानी का दरिया, झील, या तालाब हो तो व्यक्ति को अमीर बनते
देर नहीं लगती है।
☆आपके आवासीय भवन या फेक्ट्री के भवन में उत्तर-पूर्व का कोना कटा हुआ है तो आपकी
उन्नति किसी भी प्रकार से नहीं हो अक्ती है।अतःउन्नति के मार्ग में अनेक बाधाए उत्पन्न हो सकती है।
☆उत्तर-पूर्व में यदि ऊँचा चबूतरा भी है तो दुनिया के सारे कष्ट आपको भोगने ही है।
☆उत्तरी क्षेत्र का कटाव उस भवन में रहने वाले, पुरुषों को बर्बाद कर देता है।मिरर से
दोष समाप्त करें।
☆पूर्वी क्षेत्र का कटाव स्त्रियों को भारी कष्ट प्रदान कर देता है।
☆हमेशा याद रखे कि कैसी भी स्थिति हो कभी भी भूल कर उत्तर-पूर्व को ऊँचा ना रखें।
यदि है तो इसे ठीक करवा देने में ही भलाई होती है।
☆व्यापार बहुत ही यदि मन्दा पढ़ गया हो तो दक्षिण की चाहर दीवारी के मुंडेर पर ईंटो की
चिनाई करवा कर उसे ऊँचा कर दे, इससे व्यापार
में तेजी आनी शुरू हो जायेगी।
☆उत्तरी दीवार को नीचा राखे, कहने का मतलब
यह है कि ऊँची उत्तरी दीवार व्यापार को रोकती है, और उसमे बाधा उत्पन्न करती है।
☆उत्तरी फर्श और उत्तरी दीवार को ठीक करके आप बंद पड़े व्यापार को भी एक गति दे सकते है।
☆घर का भवन या फेक्ट्री का भवन बनाते समय सबसे बाद में उत्तरी दीवार बनवायें।
☆भवन के उत्तरी वायव्य, पश्चिमी, नैऋत्य, दक्षिणी नैऋत्य, और पूर्वी आग्नेय में यदि द्वार
होता है तो, धन के लिए यह शुभ नहीं होता है।
☆इस दिशाओं में खिड़कियाँ, दरवाजे, रोशन दान,सही अनुपात मे रखे कि अल्ट्रा वायरस
किरणे घर को ठीक ही रखे।
☆दोपहर का प्रकाश इन दिशाओं में न आने दें। अन्यथा प्राप्त धन या अपनी जमा पूँजी भी खत्म
हो जाती है।
☆भवन का उत्तरी भाग ऊँचा न रखे इससे दुर्भाग्य पूर्ण हवाए उत्पन्न होती है।
☆घर का दक्षिण-पश्चिम भाग नीचा ना रखे, और यहां कुआं, अंडरग्राउण्ड टैंक, बौरवेल,
आदि भी ना लगाए. इससे जानलेवा ऊर्जा पैदा होती है।
इस बात का भी हमेशा ध्यान रखे कि भवन के बीचो बीच में कुआं, टैंक, बोरवेल, बेसमेंट, आदि नहीं होना चाहिए. इनसे घर के लोगो का दुर्भाग्य शुरू हो जाता है।