रात को सोने से पहले न करें यह काम, लक्ष्मी छोड़ जाएंगी आपका साथ :

शास्त्रों में ऐसा वर्णन है की रात का समय इन्द्र पत्नी रति को समर्पित है। रति का उद्गमन रात्रि शब्द से हुआ है। चराचर जगत में देवी महालक्ष्मी को रात की देवी कहा गया है। देवी महालक्ष्मी के आठ स्वरूप बताए गए हैं। आठवीं देवी ऐश्वर्य लक्ष्मी अर्थात गृह लक्ष्मी कहलाती हैं। दिन के आठ पहरों पर इन्हीं आठों लक्ष्मीयों का वास होता है। रात के पहर में सर्वाधिक प्रभावशाली ऐश्वर्य लक्ष्मी हो जाती हैं। वह किसी भी व्यक्ति की जीवन संगिनी अर्थात उसकी पत्नी होती हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली में लक्ष्मी के तीन भाव कहे गए हैं। पहला लग्न दूसरा पंचम और तीसरा नवम। इसके साथ-साथ कुण्डली में लक्ष्मी का विशेष स्थान सातवां कहा गया है। यही सप्तम स्थान पत्नी को संबोधित करता है।

पौराणिक व तंत्र शास्त्रों में धन की देवी को स्थिर रखने के लिए अनेक यतन, प्रयास व अनुष्ठान बताए गए हैं परंतु यह अनुष्ठान व प्रयास अत्यंत कठिन व ख़र्चीले हैं जिसे आज के बिज़ी मॉडर्न टाइम में आम व्यक्ति के लिए करना लगभग असंभव जैसा है।शास्त्रों में ऐसे कुछ काम भी बताएं गए हैं जो रात को करने पर ऐश्वर्य लक्ष्मी कोे नाराज कर देते हैं-

* जीवन संगीनी से कलेश न करें।

* जीवनसाथी को बाल खोल कर न सोने दें।

* रात को नाखुन न काटें।

* शेव न करें।

* बाल न कटवाएं।

* चाबीयों का छल्ला न हिलाएं।

* बर्तनों को एक-दूसरे से न टकराने दें।

* कपड़े न धोएं।

* चावल न खाएं।

* सफेद दूध न पीएं।