पूजा हो, तो ऐसी हो****

एक भिक्षु मंदिर के बाहर एक ही जगह बैठकर रोज भगवान का मन ही मन जप किया करता था. . .
एक दिन आकाशवाणी हुई और भगवान ने कहा कि ” हे भिक्षु! तू पिछले पचास सालों से जप कर रहा है, लेकिन तेरी पूजा स्वीकार नही हुई है. . . !
भिक्षु के साथ बैठने वाले दूसरे लोगों और उस समय मंदिर मे उपस्थित सभी भक्तों को यह आकाशवाणी सुनकर बहुत दुख हुआ लेकिन भिक्षु यह सुनकर बहुत खुश हुआ और नाचने लगा. . .
यह पूछने पर कि बाबा आपकी पचास साल की पूजा-अर्चना बेकार चली गई और आप खुश हो रहे हैं ? उस भिक्षु का जवाब था कि भले ही मेरी पचास साल की बंदगी कबूल न हुई हो, लेकिन भगवान को यह तो पता है कि मैं पिछले पचास सालों से उनको याद कर रहा हूं . . . . . जय हो एेसे भक्त की