मूलांक 2

जिन व्यक्तियों का मूलांक 2 होता है वह प्रायः पेट से संबंधित रोगों से पीड़ित रहते हैं।

इन्हें प्रायः अपच, गैस, अफरा, मंदाग्नि या अतिसार इत्यादि रोग ग्रसित कर सकते हैं। इन्हें चाहिए कि वे आरंभ से ही भले ही इन्हें कोई भी रोग न हो अपने खान-पान पर नियंत्रण रखना चाहिए। नियमित भोजन करें और सदैव भूख से कम भोजन करें।
व्यायाम:
इस मूलांक वाले व्यक्तियों को योगसनों में मयूरासन, सर्वांगासन, उत्तानपादासन और पवनमुक्तासन का नियमित व्यायाम करना चाहिए। भले ही दस मिनट के लिए करें। इन्हें चाहिए कि रात का खाना दिन टलने के साथ ही कर लेना चािहए, जिससे अच्छी नींद आएगी और भोजन से रस बनने में मदद मिलेगी। सूर्य नमस्कार भी अति उत्तमआसन है। रात को ऐसे पदार्थों का सेवन करें जिनसे गैस बनती हो। व्रत: ऐसे व्यक्तियों को सोमवार का व्रत करना चाहिए। साथ ही पूर्णिमा एवं प्रदोषत व्रत भी रखें।

उपासना:
आपके आराध्यदेव श्री शंकर जी है। प्रतिदिन घर में या मंदिर शिवजी का पूजन करें तथा शिव स्तोत्र, शिव चालिसा का पाठ करना चाहिए।

जड़ी बूटी व खाद्य पदार्थ: आपके लिए प्रमुख खाद्य पदार्थ है गोभी, शलजम, खीरा,खबूजा, अलसी इत्यादि।

अनुकूल रंग:
हल्का हरा रंग आपके लिए उपयुक्त है। काले और अत्यधिक गहरे रंगों से बचना चाहिए तथा हल्के हरे रंग का रूमाल सदा अपनी जेब में रखना चाहिए। घर के पर्दे, सोफे, आदि हरे रंग के ही रखें। घर में चार-छह गमले भी रखें जिनमें हरे पौधे लहलहाते रहें।

रत्न व धातु:
आपके लिए सर्वाधिक लाभकारी रत्न मोती है। धातु के रूप में चांदी आवश्यक है। पुरूष चांदी में मोती जड़वा कर पहनें व महिलाएं नाक में छोटे-छोटे मोती जड़वाकर पहने तो अप्रत्याशित लाभ होगा।

महत्वपूर्ण:
आपके जीवन के 20,25,29,43,47,52वें तथा 65वें वर्ष में स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा। जनवरी, फरवरी तथा जुलाई में आपको रोगों तथा अधक परिश्रम से बचकर रहना चाहिए।