मूलांक 4

इस मूलांक के व्यक्ति प्रायः रक्त की कमी से पीड़ित रहते हैं, जिसे अंग्रेजी में एनीमिया कहते हैं तथा रहस्यमय रोगोंसे ग्रस्त होने की संभावना है जिनका निदान कठिन होगा। वे न्यूनाधिक उदासीपन, रक्ताल्पता तथा सिर एवं कमर दर्द रहेंगे। इन्हें विद्युत चिकित्सा तथा सम्मेहन विद्या से लाभ होगा। थोड़ा सा ही बीमार होने पर रक्त की भी कष्ट रहेगा। इसलिए इन लोगों को भोजन में ऐसे तत्वों का समावेश रखना चाहिए जिनमें लौह तत्व प्रधान हो।

व्यायाम:
यह व्यक्ति आरंभ से ही कुछ योगासन करते रहेंगे तो उन्हें रक्ताल्पता का कष्ट ही नहीं होगा। सूर्यनमस्कार, शीर्षासन, सर्वांगासन तथा श्वसासन करना चाहिए। यदि कोई से भी दो आसन करने के पश्चात वे लोग शीर्षासन को सही ढंग से प्रतिदिन नियमपूर्वक पांच मिनट भी कर लेंगे तो इन्हें कभी भी रक्त की कमी अथवा उसके अशुद्ध होने की शिकायत नहीं होगी।

व्रत:
इन्हें सोमवार और गणेश चतुर्थी का व्रत करना चाहिए। गणेश चतुर्थी का व्रत समस्त प्रकार से शुभ रहेगा।

उपासना:
इन्हें श्रीगणेश भगवान की उपासना करना चाहिए। घर में उनकी प्रतिमा या चित्र भी रख सकते हैं। श्रीगणेश जी का उपासना से धन-धान्य की कमी नहीं रहेगा। नारदपुराणोक्त संकष्टनाशक श्री गणेश स्तोत्र का नियमितपाठ करें।

जड़ी-बूटी व खाद्य पदार्थः हरी सब्जियों का प्रयोग अत्यधिक करें जैसे पालक, लौकी, तोरई मेथी, इत्यादि। नशीले पदार्थ व अत्यधिक मसालेदार पदार्थों का सेवन से बचना चाहिए।

अनुकूल रंग:
चमकदार नीला रंग इनके लिए अनुकूल है। टाई भी इसीरंग की पहनें या नीले रंग का रूमाल तो अवश्य हमेशा अपने पास रखना चाहिए।

रत्न व धातु:
आपके लिए सौभाग्यवर्धक रत्न नीलम है। नीलम अनुकूल न हो तो गोमेद धारणकरें तो धन धान्य की कमी कभी नहीं रहेगी।नीलम या गोमेद पंच धातु की अंगूठी में मध्यमा उंगली में धारण करें।

महत्वपूर्ण:
13, 22, 31, 40, 49 और 58वां वर्ष स्वास्थ्य में परिवर्तन की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेंगे। जनवरी, फरवरी, जुलाई, अगस्त व सितंबर माह में स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें व अत्यधिक परिश्रम से बचें।