आज बात करते है बुध की बुध भी एक अहम भूमिका देता है मानव जीवन मे ऐ यादाश्त और वाणी का नाक का भी का भी कारक है सुगंने की क्षमता ऐसे लोगो की तेज होती है जिनका बुध शुभ हो ऐ गणित व गणना करना जैसी विषयो मे माहिर होते है ऐसे वाणी से चतुर होते है एक बार चेहरा देख कर ही समझ जाते है या आवाज सुन कर भांप जाते है की किससे कैसे बात करनी है ऐसे लोग इस कला को कई तरह से प्रयोग करते है जैसे वेवकूफ बनाने काम निकालने के लिए झूठ बोलना ऐ सब । बचपन से इसकी शुभता बच्चो को काफी तेज दिमाग और गजब का टैलेटं देता है ।ऐसे लोग घर बैठे बैठे लाखो का सौदा करते है चाहै जमीनी हो या शेयर मार्किट से सबंधित हो नौकरी मे इनकम टैक्स बैकं मे या एक अच्छा सीऐ होते है । इसका खराब होने का पहला असर है की कुछ याद नही रहता उसे सुगंध व दुर्गध का पता नही चलता है यदि वो नौकरी कर रहा है तो उसका मन एक जगह नही रहता वो एक के बाद बदलता रहता है ऐसे लोग अपना ब्यापार बदलते रहते है जो शुरू वो करते है वो पहले तो ठीक चलेगा पर बाद मे सब खतम हो जाता है ऐसे लोगो के पैसे बडे फसते है जो लेगा वो वापस नही देता यदि बुध के साथ मगंल भी खराब हो तो धोखा इनको मिलता है देखा गया है की ऐसे लोगो लाखो की चपेत लगा कर पार्टनर भाग जाता है यदि बुध शुक्र मगंल साथ हो तो नपुसंक योग देता है यदि सातवे पाचवे मे हो तो ऐसे लोग न शादी का सुख भोग पाते है न पत्नी को दे सकते है इच्छा कायम रहेगी पर कुछ होता नही लगातार काम मे गिरावट आना नौकरी लगते लगते छूठ जाना या एक दो नबंर से मुख्य परिक्षा मे रूकना ऐ बुध का खराब योग जब मृत्यु निकट हो तो ऐसे लोगो को अपनी नाक दिखना बदं हो जाता है बुध्दी क्षुब्द होकर जो सगे मर चुके हो हर रोज देखता है कहा जाता है की जिनकी मृत्यु निकट होती है उनका माथे पर तिलक सुखता नही है खैर बात बुध की थी खराबी के हालाद मे ऐसे लोगो के घर मे मनी प्लाटं की बेल अधिक फैलने लगती ऐ लोग घर की छत और चारो ओर हरे पौधे लगाने के सौकीन होने लगते पर घर मे उतना कलेश बढने लगता है कुंडली में इसकी स्थिति काफी अधिक महत्व रखती है। यदि बुध अच्छी स्थिति में होतो व्यक्ति को बुद्धि संबंधी कार्यों में विशेष सफलताएं प्राप्त होती हैं। जबकि ये अशुभ स्थिति में हो तो कई प्रकार की मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।बुध एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के सानिध्य में ही रहता है। जब कोई ग्रह सूर्य के साथ होता है तो उसे अस्त माना जाता है। यदि बुध भी 14 डिग्री या उससे कम में सूर्य के साथ हो, तो उसे अस्त माना जाता है। लेकिन सूर्य के साथ रहने पर बुध ग्रह को अस्त का दोष नहीं लगता और अस्त होने से परिणामों में भी बहुत अधिक अंतर नहीं देखा गया है। बुध ग्रह कालपुरुष की कुंडली में तृतीय और छठे भाव का प्रतिनिधित्व करता है। बुध की कुशलता को निखारने के लिए की गयी कोशिश, छठे भाव द्वारा दिखाई देती है। जब-जबबुध का संबंध शुक्र, चंद्रमा और दशम भाव से बनता है और लग्न से दशम भाव का संबंध हो, तो व्यक्ति कला-कौशल को अपने जीवन-यापन का साधन बनाता है। जब-जब तृतीय भाव से बुध, चंद्रमा, शुक्र का संबंध बनता है तो व्यक्तिगायन क्षेत्र में कुशल होता है। अगर यह संबंध दशम और लग्न से भी बने तो इस कला को अपने जीवन का साधन बनाता है। इसी तरह यदि बुध का संबंध शनि केतु से बने और दशम लग्न प्रभावित करे, तो तकनीकी की तरफ व्यक्ति की रुचि बनती है। कितना ऊपर जाता है या कितनी उच्च शिक्षा ग्रहण करता है, इस क्षेत्र में, यह पंचम भाव और दशमेश की स्थिति पर निर्भर करता है। पंचम भाव से शिक्षा का स्तर और दशम भाव और दशमेश से कार्य का स्तर पता लगता है। बुध लेख की कुशलता को भी दर्शाता है। यदि बुध पंचम भाव से संबंधित हो, और यह संबंध लग्नेश, तृतीयेश और दशमेश से बनता है, तो संचार माध्यम से जीविकोपार्जन को दर्शाता है और पत्रकारिता को भी दर्शाता है। अनुसार मंगल से बुध का संबंध हो और दशम लग्न आदि से संबंध बनता हो और बृहस्पति की दृष्टिया स्थान परिवर्तन द्वारा संबंध बन रहा हो, तो इंसान को वाणिज्य के कार्यों में कुशलता मिलती है। इस प्रकार कुशलता बुध तय करता है।क्षेत्र अलग-अलग ग्रहों और भावों व भावों के स्वामी का संबंध जीवकोपार्जन का क्षेत्रबताता है। यद्यपि इस प्रकार के बहुत से क्षेत्र हैं, लेकिन उन पर बुध ग्रह का प्रभाव अवश्य देखने को मिलता है।

आज की ऐस्ट्रो टिप——यदि किसी को हमेशा काम मे निराशा हाथ लगती हो हर बार परिक्षा मे मेहनत करने पर असफल हो जाते है तो किसी बूढी किन्नर को हरी साडी और हरे मे कपडे मूगं साबूत और 50 रूपऐ हर बुध वार को देवे । और जितनी उम्र हो उतनी इलाइची शिवलिगं पर चढाऐ बुधवार को ।