हर ग्रह हमारे जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के प्रभाव डालता है…

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ज्योतिष के अनुसार ग्रह वे खगोलीय पिंड हैं,
जो पृथ्वी के साथ-साथ अंतरिक्ष में गतिमान हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि ये खगोलीय पिंड प्रकृति, पृथ्वी और पृथ्वी रहने वाले जीवों पर काफी हद तक अपना प्रभाव डालते हैं।

वैदिक ज्योतिष के दृष्टिकोण से सूर्य सबसे चमकीला ग्रह है तथा चन्द्रमा उपग्रह है। इनके अलावा बाकी ग्रह शुक्र, बुध, मंगल, बृहस्पति और शनि हैं जबकि राहु और केतू को संवेदनशील या छाया ग्रह माना जाता है।

हिन्दू पौराणिक कथाओं में ग्रह के बारे में कहा गया है- ‘सम भवते सम ग्रह’। इसका मतलब है जो प्रभावित करता है उसे ग्रह कहा जाता है।

‘बृहत पराशर होरा शास्त्र'(अध्याय 2, पद्य 3-4) के अनुसार भगवान विष्णु के कुछ अवतार धीरे-धीरे ग्रहों के रूप में विकसित हो गए।
ये ग्रह और इनकी स्थिति ही व्यक्तियों को उनके कर्मों या कार्यों का फल देती है

सूर्य जीवन का प्रतिनिधित्व करता है।
सूर्य अहंकार और जागरुकता के साथ-साथ शारीरिक ऊर्जा का भी प्रतीक है।

इतिहास मे सूर्य को कई नामों से जाना जाता रहा है और ऐसा माना जाता है कि संसार को इसका ज्ञान स्वयं ब्रम्हा ने दिया है
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सूर्य अदिति और ऋषि कश्यप के पुत्र हैं।

ज्योतिष की दृष्टि से एक कुंडली में सूर्य आत्मा, स्वास्थ्य, पिता, शक्ति, रॉयल्टी, सत्ता, शोहरत, नाम, साहस, विरासत, चिकित्सा, आत्म-बोध, प्रभाव, प्रतिष्ठा, ताकत, एहसान, ज्ञान और अन्य कई तथ्यों का प्रतीक है।

सूर्य सभी व्यक्तियों की इच्छाशक्ति, ऊर्जा और सौभाग्य को बढ़ाता है। यह व्यक्तियों को बेहतर जीवन जीने में मदद करता है। किसी व्यक्ति, उसके व्यक्तित्व, ज्ञान और प्राप्तियों आदि सभी में सूर्य एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

एक व्यक्ति अपने जीवन में जो भी बनना चाहता है, जो कामना करता है, उसकी सोचने की दिशा, उसके मूलभूत प्रश्न, ये सब सूर्य से ही निश्चित होते हैं। यह जीवनशक्ति, नेतृत्व, रचनात्मकता और मानव जाति की विशालता का प्रतिनिधित्व करता है।

सूर्य अपनी ऊर्जा किस प्रकार प्रकट करेगा यह सूर्य की स्थिति, उसके भाव (घर या स्थान) जिसमें में वह बैठा है, अन्य ग्रहों पर पड़ने वाला उसका प्रभाव और सूर्य पर पड़ने वाला बाकी ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करता है।

सूर्य और इसकी स्थिति किसी व्यक्ति की पहचान पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव को दर्शाती है। सूर्य की स्थिति या इसका भाव हम पर विशेष प्रभाव डालता है और एक विशिष्ट व्यक्ति बनने में हमारी मदद करता है।

अगर सूर्य कुंडली में सही स्थान पर हो तो यह उपर वर्णित घटकों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए व्यक्ति की जिन्दगी को बदल देता है। किंतु अगर यह सही स्थान पर न हो तो व्यक्ति को सचेत रहने की ज़रूरत होती है।

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