घर की अशांति को शांति में बदलने के उपाय
यदि किसी के घर में सुख और शांति नहीं है। लड़ाई-झगड़े होना आम बात होती है। पारिवारिक समस्याएं स्थायी रूप से रहती हैं। मन अशांत रहता है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं, क्योंकि आप कुछ ऐसे उपाय आजमा सकते हैं, जिनसे आपके परिवार की इन परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है।
जो व्यक्ति यह समझते हैं कि घर के लोग उसकी बात को गंभीरता से नहीं लेते, जबकि वह हमेशा सही होता है। ऐसे व्यक्ति को नियमित रूप से जल में थोड़ा-सा गुड मिलाकर नीचे दिए गए मंत्र का जाप करने के साथ सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
मंत्र – ऊँ घृणिः सूर्याय नमः
पारिवारिक झगड़े या घर के नित नए क्लेश के कारण मन अशांत रहता है, तो मिट्टी के कुल्लड़ में थोड़ा सा कच्चा दूध (बिना उबाला हुआ) लेकर उसमें कुछ बूंदे शहद की मिलाएं और उसे घर की छत, सभी कमरों, आंगन और मुख्य द्वार पर छिड़क दें। राहत मिलेगी।
यदि घर में किसी भी चीज की संपन्नता स्थिर नहीं रह पाती है, तो महालक्ष्मी यंत्र को स्थापित करें, शाम के समय यंत्र का मन में स्मरण करते हुए श्रीं श्रिययै नमः का नियमित जाप करें। आप जितनी अधिक संख्या में इस मंत्र का जाप करेंगे, उतना ही लाभ मिलेगा। ध्यान रखें महालक्ष्मी यंत्र की स्थापना विषय विशेषज्ञ से ही करवाएं।
घर में आपको या आपके घर के किसी परिजन को किसी से डर लगता है, तो आप पूजा स्थल में किसी विद्वान ब्रह्मण से श्री गायत्री मंत्र की स्थापना कराएं और गायत्री मंत्र ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् का नित्य जाप करें।
यदि आपके घर में प्रतिदिन कोई न कोई मुसीबत आती रहती है और आपको लगता है कि कोई आप पर बुरी शक्तियों का उपयोग कर रहा है, तो आप किसी भी माह के शुक्लपक्ष में सोमवार को पंडित से नवदुर्गा यंत्र को घर के मुख्य द्वार पर लगाकर रोज 21 बार ऊँ ह्रीं दुर्गायै नमः का जप करें।
यदि घर में कोई न कोई अनर्थ होता रहता है, तो किसी शुभ समय में गंगाजल में पिसी हल्दी मिलाकर, उससे मुख्य द्वार के दोनों ओर ऊँ और स्वास्तिक का चिह्न बना दें।
श्रीमद्भागवत गीता के 11वें अध्याय के 36वें श्लोक को गत्ते पर लाल स्याही से लिखकर टांग देने से घर की समस्त बाधाओं का अंत हो सकता है।