आंखो में रौशनी नहीं थी फिर भी अपनी गायकी के हुनर से संगीत इंडस्ट्री को रौशन करने वाले रवींद्र जैन अब हमारे बीच नहीं हैं. 71 साल के मशहूर संगीतकार का मुंबई के लीलावती अस्पताल में इलाज चल रहा था. इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. 70 से 80 के दशक में भारतीय सिनेमा को हिट म्यूजि‍क देने वाले इस कलाकार के संगीत के सफर के बार

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बजपन में ही रवींद्र जैन ने जैन भजन और जैन कवियों की कविताएं गाना शुरू कर दिया था.
कलकत्ता से रवींद्र जैन की फिल्मों में एंट्री हुई और फिर 10 साल बाद मुंबई पहुंचकर क्रांति और बलिदान जैसी फि‍ल्मों को संगीत दिया.

एक से बढ़ कर एक हिट म्यूजिक देकर कई फिल्मों जैसे ‘गीत गाता चल’, ‘चोर मचाए शोर’, ‘अंखियों के झरोखों’ से में बेहतरीन संगीत के जरिए रवींद्र ने दर्शकों के दिल पर जादू कर दिया.

रवींद्र जैन फिल्मों में संगीत देने वाले एक चमकते सितारे की तरह उभरकर सामने आए. उन्हें सबसे बड़ा ब्रेक राज कपूर ने दिया जिसके चलते उन्होंने ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘दो जासूस’ और ‘हिना’ जैसी सुपरहिट फिल्मों का संगीत दिया.

कहा जाता है रवींद्र बहुत मेहनती थे वह कोई काम अधूरा नहीं छोड़ते थे, फिल्म सौदागर के म्यूजिक रिकॉर्डिंग के दौरान उनके पिता का देहान्त हो गया लेकिन काम पूरा किए बिना वह घर नहीं गए.

रवींद्र जैन ने ना सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में बल्कि टीवी इंडस्ट्री में भी अपने संगीत का जादू बिखेड़ा. रामायण, लव कुश जैसे कई मशहूर धार्मिक टीवी सीरियल्स के लिए भी उन्होंने गाया और कंपोज किया

साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘हिना’ में रवींद्र जैन ने ही म्यूजिक दिया था. इस फिल्म का म्यूजिक उस दशक में काफी हिट साबित हुआ. इस फिल्म को रणधीर कपूर ने डायरेक्ट किया था.

दक्ष‍िण भारतीय गायक येसुदास को हिन्दी फिल्मों में लाने का श्रेय रवींद्र जैन को ही जाता है.

हिन्दी सिनेमा में योगदान के लिए साल 2015 में रवींद्र जैन को पद्मश्री अवॉर्ड से भी नवाजा गया.

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