download (1)

वास्तुशास्त्र में पश्चिम दिशा (West direction in Vastu)

पश्चिम दिशा का स्वामी वरूण देव  हैं.इसके अलावा शनि देव भी

पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करते हैं. जानते है पश्चिम दिशा का

वास्तु शास्त्र मे महत्व

भवन बनाते समय इस दिशा को रिक्त नहीं रखना चाहिए.

इस दिशा में भारी निर्माण शुभ होता है.

इस दिशा की दीवार घर  की अन्य दीवारों से मोटी  होनी चाहिए।

यह दिशा वास्तुशास्त्र की दृष्टि से शुभ होने पर मान सम्मान, प्रतिष्ठा, सुखऔर समृद्धि कारक होता है.
पारिवारिक जीवन मधुर रहता है.

वास्तु  के अनुसार इस दिशा में कमरा होना अच्छा  रहता है.

इस दिशा में वास्तुदोष होने पर गृहस्थ जीवन में सुख की कमी आती है.
पति पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध का अभाव रहता है.कारोबार में साझेदारों से मनमुटाव रहता है.

इस दिशा में किसी भी प्रकार की बोरिंग या गड्डे करने से बचना चाहिए। घर में पानी का बहाव पश्चिम की और नही होना चाहिए।

घर के अंदर पश्चिमी दीवार को भारी व् भरी हुई रखना चाहिए।
पश्चिमी दीवार पर तरेड़ या कोई क्रेक आना अच्छा नही माना जाता।

पश्चिमी दीवार पर मोर पंख लगाने से इस दिशा के वास्तु दोष के प्रभाव में कमी आती है.
Thanks
Advertisements