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पुणे के बुधवार पेठ में दगड़ु सेठ गणपति का मंदिर है। ये पुणे शहर का सबसे लोकप्रिय मंदिर है। मंदिर के गणपति का शृंगार इतना भव्य होता है कि आपको सड़क से चलते हुए भी दिखाई दे जाता है। मूर्ति का शृंगार अद्भुत है, जिसे श्रद्धालु देखते ही रह जाते हैं। दगड़ु सेठ गणपति मंदिर को श्री दगड़ु सेठ हलवाई और उनकी पत्नी लक्ष्मी बाई ने बनवाया था। इस मंदिर की स्थापना 1893 में हुई। दगड़ु सेठ गणेश के परम भक्त थे। ये मंदिर उन्होंने तब बनवाया, जब उनके प्रिय बेटे की 1892 में प्लेग से मौत हो गई। दगड़ु सेठ किशन सेठ श्रीवास्तव मूल रूप से कानपुर के रहने वाले थे, जिनका परिवार पुणे चला आया था। वे कायस्थ थे, लेकिन पुणे आकर उन्होंने हलवाई का काम करना शुरू कर दिया था, इसलिए वे पुणे में हलवाई के नाम से प्रसिद्ध हो गए।

वे बहुत अच्छे कुश्तीबाज थे और आजादी के आंदोलन के बड़े नेता लोकमान्य तिलक के दोस्त भी थे। तिलक ने जब सार्वजनिक रूप से गणपति पूजन की शुरुआत की, तब इस मंदिर का महत्व बढ़ गया। इस मंदिर की व्यवस्था अब दगड़ु सेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट देखता है। दान और चंदे के लिहाज से ये महाराष्ट्र के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की खास बात ये है कि यहां हर रोज गणेश जी का अलग तरीके से शृंगार किया जाता है। ये शृंगार काफी भव्य होता है, जो दूर से ही जगमग करता रहता है। मंदिर की वेबसाइट पर हर रोज नए शृंगार की तस्वीर अपलोड की जाती है। मंदिर ट्रस्ट कई तरह के समाज सेवा प्रकल्प चलाता है। मंदिर की ओर से शहर में एक वृद्धाश्रम चलाया जा रहा है।

गणपति उत्सव पर विशाल मेला: हर साल गणपति उत्सव और गुड़ी पड़वा उत्सव के आसपास मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है। इन दिनों गणेश जी की प्रतिमा का शृंगार और भी अद्भुत होता है।

कैसे पहुंचें
गणपति का ये मंदिर पुणे के भीड़भाड़ भरे बाजार में स्थित है। अगर आप अपने वाहन से जाते हैं तो पार्किंग में दिक्कतें आती हैं। मंदिर के आसपास इलाके में घना बाजार है। आप स्वार गेट बस डिपो से महात्मा फूले मार्केट के लिए बस लें। फूले मार्केट से टहलते हुए मंदिर दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं।