किसी व्यक्ति की कुंडली में चार, आठ या बारहवें भाव में शनि है तो उस व्यक्ति को शनि की कृपा प्राप्त होती है। शनि नीच राशि में या अस्त या वक्री हो तो व्यक्ति को दुख और कष्ट ही देता है। शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है। अक्सर यह सुनने में आता है कि ‘फला जातक को शनि की साढ़े साती लग गई’।

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साढ़े साती के प्रति लोगों के हृदय में डर की भावना बनी हुई है। साढ़े साती (Shani Sadhe Sati) के दौरान माना जाता है कि व्यक्ति को निराशा, असंतोष, विवाद, कलह और विपरीत परिणामों का सामना करना होता है, परंतु पूरी तरह से इसे स्वीकार करना सही नहीं है।

साढ़े साती क्या है (What is Shani Sade Sati)
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार साढ़े साती तब बनती है जब शनि गोचर में जन्म चन्द्र से प्रथम, द्वितीय और द्वादश भाव से गुजरता है। शनि एक राशि से गुजरने में ढ़ाई वर्ष का समय लेता है इस तरह तीन राशियों से गुजरते हुए यह साढ़े सात वर्ष का समय लेता है जो साढ़े साती कही जाती है। सामान्य अर्थ में साढ़े साती का अर्थ हुआ सात वर्ष छ: मास।

साढ़े साती (Shani Sadhe Sati) के दौरान माना जाता है कि व्यक्ति को निराशा, असंतोष, विवाद, कलह और विपरीत परिणामों का सामना करना होता है, परंतु पूरी तरह से इसे स्वीकार करना सही नहीं है। साढ़े साती (Shani Sadhe Sati) सभी के लिए बुरा परिणाम लाता है ऐसा नहीं है। उदाहरणस्वरूप अगर शनि योग कारक है तो इस बात की कोई संभावना नहीं बनती कि शनि व्यक्ति को परेशान करेगा। अधिकतर लोगों को साढ़े साती के तीन चरणों से गुजरना होता है चौथा चरण का सामना बहुत कम लोगों को करना होता है। राशि चक्र में साढ़े साती फिर से लौट कर तब आती है जब पहली साढ़े साती के 25 वर्ष पूरे हो जाते हैं।

साढ़े साती का प्रभाव (Effects of Shani Sade Sati)
यह सही है कि साढ़े साती के समय व्यक्ति को कठिनाईयों एवं परेशानियों का सामना करना होता है परंतु इसमें घबराने वाली बात नहीं हैं। इसमे कठिनाई और मुश्किल हालत जरूर आते हैं परंतु इस दौरान व्यक्ति को कामयाबी भी मिलती है। बहुत से व्यक्ति साढ़े साती के प्रभाव से सफलता की उंचाईयों पर पहुंच जाते हैं। साढ़े साती व्यक्ति को कर्मशील बनाता है और उसे कर्म की ओर ले जाता है। हठी, अभिमानी और कठोर व्यक्तियों से यह काफी मेहनत करवाता है।

साढ़े साती के तीन चरण (Three steps of Shani Sade Sati)

  • साढ़े साती का पहला चरण(First step of Shani Sadhe Sati) नज़दीकी रिश्तेदारों और जातक को प्रभावित करता है.
  • साढ़े साती का दूसरा चरण (Second step of Shani Sadhe Sati) चरण व्यापार और गृहस्थी को प्रभावित करता है।
  • साढ़े साती का तीसरा चरण (Third  step of Shani Sadhe Sati) चरण बच्चों, परिवार, स्वास्थ्य को प्रभावित करता है इस चरण में मृत्यु तुल्य कष्ट की अनुभूति होती है.

परंतु किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पूर्व ज्योतिषाचार्यों को इन विषयों पर ध्यान देना चाहिए।शनि जन्म कुण्डली में शुभ हैं अथवा अशुभ, दशा कौन सी चल रही है और उसमें शनि की स्थिति कैसी है। क्या गोचर में शनि वृहस्पति से वेध हो रहा है। जन्म कुण्डली में नक्षत्रों पर शनि का क्या प्रभाव है। कितने ग्रह कोण और केन्द्र में शुभ स्थिति में हैं तथा लग्न और लग्नेश की दशा कैसी है। इन स्थितियों के आंकलन के आधार पर ही शनि के अच्छे बुरे प्रभाव को जाना जा सकता है।

शनि के प्रथम चरण का प्रभाव (Effects of 1st Step of Shani Sade Sati)
प्रथम चरण में शनि जब चन्द्रमा से 12 वें भाव में गुजरता है तब ढाई वर्ष में जो परिणाम होते हैं वह इस प्रकार हैं। इस क्रम में व्यक्ति के माता पिता एवं नज़दीकी सम्बन्धियों को एवं स्वयं भी अशुभ परिणाम भुगतना होता है। इस दौरान आंखों में पीड़ा की अनुभूति होती है। इस अवस्था में शनि तीसरी दृष्टि से 2 भाव को देखता है जिससे आर्थिक परेशानी महसूस होती है। इस चरण में दशम दृष्टि से नवम भाव को देखने से कार्यों में बाधा महसूस होती है और व्यक्ति के पिता को भी कष्ट की अनुभूति होती है।

शनि के द्वितीय चरण का प्रभाव (Effects of 2nd Step of Shani Sade Sati)
इस चरण में शनि द्वारा सप्तम भाव को सप्तम दृष्टि से देखने के कारण गृहस्थी में और दशम भाव को दशम दृष्टि से देखने के कारण व्यावसायिक क्षेत्र में परेशानियों का सामना करना होता है। इस स्थिति में आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य में गिरावट, परिवार में विभाजन, दोस्तों से अनबन, अनावश्यक खर्च में वृद्धि, मानहानि, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की कमी होती है। लेकिन यह तमाम स्थिति तभी आती है जब शनि जन्म कुण्डली में पूरी तरह अशुभ हो अन्यथा इस चरण में व्यक्ति को मिला जुला फल प्राप्त होता है।

शनि के तृतीय चरण का प्रभाव: (Effects of 3rd Step of Shani Sade Sati)
तृतीय चरण के दौरान जब शनि गोचर में चन्द्रमा से द्वितीय भाव में आता है तब यह व्यक्ति एवं बच्चों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। जीवन के अंतिम दिनों में शनि की यह स्थिति मौत को निमंत्रण देती है। चतुर्थ भाव में शनि की दृष्टि होने से धन की हानि, खर्च में वृद्धि, स्वास्थ्य में गिरावट और परिवार में कलह को जन्म देती है।साढ़े साती के प्रति लोगों के हृदय में डर की भावना बनी हुई है। साढ़े साती (Shani Sadhe Sati) के दौरान माना जाता है कि व्यक्ति को निराशा, असंतोष, विवाद, कलह और विपरीत परिणामों का सामना करना होता है, परंतु पूरी तरह से इसे स्वीकार करना सही नहीं है।

शनि के वाहन का साढ़ेसाती पर प्रभाव (Impact of Saturn’s Vahan on Sadesati)

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शास्त्रो मे शनि के नौ वाहन कहे गये है. शनि की साढेसाती के दौरान शनि जिस वाहन पर सवार होकर (Sadesati gives results according to Saturn’s ride) व्यक्ति की कुण्डली मे प्रवेश करते है. उसी के अनुरुप शनि व्यक्ति को इस अवधि मे फल देते है. वाहन जानने के लिए निम्न विधि से शनि साढ़ेसाती के वाहन का निर्धारण करते हैं

शनि के वाहन निर्धारण का तरीका – 1
व्यक्ति को अपने जन्म नक्षत्र की संख्या (Number of the birth Nakshatra) और शनि के राशि बदलने की तिथि की नक्षत्र संख्या दोनो को जोड कर योगफल को नौ से भाग करना चाहिए. शेष संख्या के आधार पर शनि का वाहन निर्धारित होता है.]

शनि का वाहन जानने की एक अन्य विधि भी प्रचलन मे है. इस विधि मे निम्न विधि अपनाते हैं

शनि के वाहन निर्धारण का तरीका – 2
शनि के राशि प्रवेश करने कि तिथि संख्या+ ऩक्षत्र संख्या +वार संख्या +नाम का प्रथम अक्षर संख्या सभी को जोडकर योगफल को 9 से भाग किया जाता है. शेष संख्या शनि का वाहन बताती है. दोनो विधियो मे  शेष 0 बचने पर संख्या नौ समझनी चाहिए.

  • अगर शेष संख्या 1 होने पर शनि गधे पर सवार होते है. इस स्थिति मे मेहनत के अनुसार फल मिलते है.
  • शेष सँख्या 2 होने पर शनि घोडे पर सवार होते है. और व्यक्ति को शत्रुओ पर विजय दिलाते है.
  • शेष सँख्या 3 होने पर शनि को हाथी पर सवार कहा गया है-  इस अवधि मे आशा के विपरित फल मिलते है.
  • शेष सँख्या 4 होने पर शनि को भैसे पर सवार बताया गया है- ऎसा होने पर व्यक्ति को मिले जुले फल मिलते है.
  • शेष सँख्या 5 होने पर शनि सिंह पर सवार होते है. व्यक्ति अपने शत्रुओ को हराता है.
  • शेष सँख्या 6 होने पर शनि सियार पर सवार माने गये है. इस दौरान शनि अप्रिय समाचार देते है.
  • शेष सँख्या 7 होने पर शनि का वाहन कौआ कहा गया है. साढेसाती की अवधि मे कलह बढती है.
  • शेष सँख्या 8 होने पर शनि को मोर पर सवार बताया गया है. व्यक्ति को शुभ फल मिलते है.
  • शेष सँख्या 9 होने पर शनि का वाहन हँस कहा गया है. व शनि व्यक्ति को सुख देते है.
  • विशेष शेष संख्या 0 आने पर सँख्या 9 समझनी चाहिए- और शनि का वाहन हँस समझना चाहिए-

शनि साढेसाती फल या वाहन के फल
जिस व्यक्ति को शनि की साढेसाती के चरण (If both the Sadesati Phase and Vehicle are unlucky, take care) के फल अशुभ मिल रहे है- तथा शनि का वाहन भी शुभ नही है- तो इस स्थिति मे साढेसाती के दौरान व्यक्ति को विशेष रुप से सावधान रहना चाहिए- इस स्थिति मे व्यक्ति के सामने अनेक चुनोतियाँ आती है- जिनका व्यक्ति को हिम्मत के साथ सामना करना चाहिए

  • अगर किसी व्यक्ति को साढेसाती के अशुभ फल (Sadesati is malefic) मिल रहे हो तथा शनि का वाहन शुभ हो तो इस स्थिति मे साढेसाती के कष्टो मे कमी आती है और व्यक्ति को मिला जुला फल मिलता है-
  • जिस व्यक्ति के लिए शनि का वाहन शुभ हो तथा साढेसाती के चरण के फल भी शुभ हो तो इस स्थिति मे शुभता बढ जाती है- पर साढेसाती का चरण शुभ तो और वाहन का फल अशुभ आ रहा हो तो व्यक्ति को मिल&जुले फल मिलते है
  • शनि का वाहन कुछ व्यक्तियो के लिए शुभ फलकारी है- तथा कुछ के लिए अशुभ फल देने वाला होता है- प्रत्येक व्यक्ति के लिए शनि के फल अलग अलग हो सकते है-

शनि वाहन : गधा (Saturn’s Vehicle – Donkey)
व्यक्ति के लिए शनि का वाहन गधा होने पर शनि की साढेसाती मे मिलने वाले शुभ फलो मे कमी होती है. शनि के इस वाहन को शुभ नही कहा गया है. शनि की साढेसाती की अवधि मे व्यक्ति को कार्यो मे सफलता प्राप्त करने के लिए काफी प्रयास करना होता है. व्यक्ति को  मेहनत के अनुरुप ही फल मिलते है. इसलिए व्यक्ति का अपने कर्तव्य का पालन करना हितकर होता है.

शनि वाहन : घोडा (Saturn’s Vehicle – Horse)
शनि का वाहन घोडा होने पर व्यक्ति को शनि की साढेसाती मे शुभ फल मिलते है. इस दौरान व्यक्ति समझदारी व अक्लमंदी से काम लेते हुए अपने शत्रुओ पर विजय हासिल करता है. व व्यक्ति अपने बुद्धिबल से अपने विरोधियों को परास्त करने मे सफल रहता है. घोडे को शक्ति का प्रतिक माना गया है इसलिए इस अवधि मे व्यक्ति के उर्जा व जोश मे बढोतरी होती है.

शनि वाहन : हाथी (Saturn’s Vehicle – Elephant)
जिस व्यक्ति के लिए शनि का वाहन हाथी होता है. उस व्यक्ति के लिए शनि के वाहन को शुभ नही कहा गया है. इस दौरान व्यक्ति को अपनी उम्मीद से हटकर फल मिलते है. इस स्थिति मे व्यक्ति को साहस व हिम्मत से काम लेना चाहिए. तथा विपरित परिस्थितियों मे भी घबराना नहीं चाहिए.

शनि वाहन : भैसा (Saturn’s Vehicle – Buffalo)
शनि का वाहन भैंसा आने पर व्यक्ति को मिले-जुले फल मिलते है. शनि की साढेसाती की अवधि मे व्यक्ति को संयम व होशियारी से काम करना चाहिए. इस सममे मे बातो को लेकर अधिर व व्याकुल होना व्यक्ति के हित मे नही होता है. व्यक्ति को इस समय मे सावधानी से काम करना चाहिए. अन्यथा कटु फलो मे वृ्द्धि होने की संभावना होती है.

शनि वाहन : सिंह (Saturn’s Vehicle – Lion)
शनि का वाहन सिँह व्यक्ति को शुभ फल देता है- सिँह वाहन होने पर व्यक्ति क समझदारी व चतुराई से काम लेना चाहिए- ऎसा करने से व्यक्ति अपने शत्रुओ पर विजय प्राप्त करने मे सफल होता है- अत इस अवधि मे व्यक्ति को अपने विरोधियोँ से घबराने की जरुरत नही होती है-

शनि वाहन : सियार (Saturn’s Vehicle – Jackal)
शनि की साढेसाती के आरम्भ होने पर शनि का वाहन सियार होने पर व्यक्ति को मिलने वाले फल शुभ नही होते है- इस स्थिति मे व्यक्ति को साहस व हिम्मत से काम लेना चाहिए- क्योकि इस दौरान व्यक्ति को अशुभ सूचनाएं अधिक मिलने की संभावनाएं बनती है

शनि वाहन : कौआ (Saturn’s Vehicle – Crow)
व्यक्ति के लिए शनि का वाहन कौआ होने पर उसे शान्ति व सँयम से काम लेना चाहिए- परिवार मे किसी मुद्दे को लेकर विवाद व कलह की स्थिति को टालने का प्रयास करना चाहिए- ज्यादा से ज्यादा बातचित कर बात को बढने से रोकने की कोशिश करनी चाहिए- इससे कष्टो मे कमी होती है

शनि वाहन : मोर  (Saturn’s Vehicle – Peacock)
शनि का वाहन मोर व्यक्ति को शुभ फल देता है- इस समय मे व्यक्ति को अपनी मेहनत के साथ&साथ भाग्य का साथ भी मिलता है- शनि की साढेसाती की अवधि मे व्यक्ति अपनी होशियारी व समझदारी से परेशानियों को कम करने मे सफल होता है- इस दौरान व्यक्ति मेहनत से अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधार पाता है-

शनि वाहन : हंस  (Saturn’s Vehicle – Swan)
जिस व्यक्ति के लिए शनि का वाहन हँस होता है उनके लिए शनि की साढेसाती की अवधि बहुत शुभ होती है- इस मे व्यक्ति बुद्धिमानी व मेहनत से काम करके भाग्य का सहयोग पाने मे सफल होता है- यह वाहन व्यक्ति के आर्थिक लाभ व सुखो को बढाता है- शनि के सभी वाहनो मे इस वाहन को सबसे अधिक अच्छा कहा गया है-

Saturn Remedies – शनि साड़ेसाती के अचूक उपाय

शनि अमावस्या पर साढ़ेसाती के प्रभाव कम करने के उपाय

एक माह में दो पक्ष होते है, एक कृष्ण पक्ष दूसरा शुक्ल पक्ष। कृष्ण पक्ष में अंधेरी राते होती है और शुक्ल पक्ष में उजाली राते होती है। शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है। उसी प्रकार से कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या का भी विशेष महात्म्य होता है। कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि को अमावस्या मनाई जाती है। शनिवार के दिन पड़ने वाली अमवस्या को शनि अमावस्या के नाम से जाना जाता है।

पूजन विधि-

शनि देव की मूर्ति तिल के तेल से का विधिवत अभिषेक व पूजन करके निम्न मन्त्र ”ऊॅ शं शनैश्चराय नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें। मन्त्र का जाप करते वक्त शनि देव के सिर पर तेल अर्पित करते रहना चाहिए। तत्पश्चात तेल के दीपक से शनि देव जी आरती करके अपने सुख व समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए।

जिन लोगों पर शनि की साढ़े-साती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए विशेष उपाय- अमावस्या की रात्रि में 8 बादाम और 8 काजल की डिब्बियों को काले वस्त्र में बाॅधकर अपनी तिजोरी में रख लें। ऐसे करने धन हानि में कमी आयेगी। शनि अमावस्या की रात्रि को शनि चालीसा का पाठ करें। इस दिन पीपल के पेड़ पर सात प्रकार का अनाज चढ़ा कर तेल का दीपक जलायें। तिल व उड़द से बने पकवानों को गरीबों को खिलाने से शनि देव की शुभ कृपा बनी रहती है। अपने हाथ की नाप का 19 हाथ लम्बा काला धागा तेल में भिगोकर पहने से लाभ मिलता है। इस दिन सुरमा, काले तिल, नागर मोथा व सौंफ को जल में मिलाकर स्नान करना चाहिए। काले उड़द की खिचड़ी में काला नमक मिलाकर स्वंय सेंवन करें एंव गरीबों को खिलायें। शनि अमावस्या के दिन सुन्दर काण्ड एंव हनुमानष्टक का पाठ करने से शनिदेव प्रसन्न होते है। शनि की शान्ति के लिए काले तिल, काला कम्बल, काला छाता, काला जूता आदि वस्तुओं का दान करने से शनि का पड़ने वाला अशुभ प्रभाव कम होता है। नोट- उपरोक्त उपायों को यदि पूरी श्रद्धा व विश्वास के साथ किया जाये तो शनि के दुष्प्रभाव से बचकर आप सुखी जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

शनि की साढ़ेसाती अगर किसी जातक पर बहुत भारी यानि कष्टकारी हो रही हो तो उसे शनि को शांत करने के उपाय करने चाहिए। शनि के उपाय करने के लिए पहले कुंडली (Shani sadesati in kundali) में शनि की दशा, स्थान, भाव आदि पर भी विचार करना जरूरी है। 

Sadesati Remedies in Hindi: जिन जातकों को शनि साढ़ेसाती से परेशानी हो उन्हें निम्न उपाय करने चाहिए: 


* सुन्दरकाण्ड या हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करना चाहिए। 

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* शनिवार को प्रात: काल पीपल के पेड़ पर जलदान करने से भी शनि पीड़ा से शांति मिलती है।

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* मान्यता है कि शनि साढ़ेसाती के दौरान काले घोड़े के नाल की अंगूठी या नाव के कील की अंगूठी भी जातक के लिए लाभप्रद होती है। 

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*  शनिवार को दान देने से भी शनि साढ़ेसाती के दौरान होने वाली पीड़ा से शांति मिलती है। 

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** शनि देव से जुड़ी वस्तुएं जैसे काली उड़द की दाल, तिल, लौह, काले कपड़े आदि का दान देना चाहिए। 

 ** नीलम की अंगूठी भी जातक के लिए लाभप्रद होती है। 

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इसके अलावा कामी अथवा आलसी व्यक्ति को नीलम बिल्कुल नहीं धारण करना चाहिए। क्योंकि ऐसी अवस्था में शनिदेव उस व्यक्ति के और खिलाफ़ हो जाते हैं तथा उसे सज़ा दे डालते हैं।

शिव पूजा और महामृत्युंजय मंत्र

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