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दिन में पांच हजार उठक-बैठक और तीन हजार दंड बैठक (पुश अप), खाने में रोजाना 10 लिटर दूघ, आधा लिटर घी, भारी मात्रा में बादाम और जूस तथा प्रतिदिन छह मुर्गियों को खाने वाला कोई इंसान एक सामान्य इंसान नहीं हो सकता, लेकिन विश्व में ‘रुस्तम-ए-जमां’ नाम से मशहूर गामा पहलवान की यह दैनिक डाइट थी.

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शेर-ए-पंजाब’, ‘रुस्तम-ए-जमां’ और ‘द ग्रेट गामा’ जैसी उपाधियों से अलंकृत हो चुके गामा पहलवान का जन्म 22 मई 1878 में पंजाब के अमृतसर में हुआ. बचपन में गुलाम मुहम्मद के नाम से पहचाने जाने वाले गामा पहलवान के पिता मुहम्मद अजीज भी एक पहलवान थे, इसलिए कह सकते हैं कि पहलवानी उनके रग-रग में बसी थी. वैसे शुरुआत में गामा ने कुश्ती के दांव-पेच पंजाब के मशहूर ‘पहलवान माधोसिंह’ से सीखा लेकिन बाद में दतिया के महाराजा भवानीसिंह ने गामा को पहलवानी करने की सुविधायें प्रदान की. विभाजन से पहले उन्होंने भारत का नाम पूरे विश्व में ऊंचा किया. 1947 में विभाजन के बाद वह पाकिस्तान चले गए.

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कश्मीरी ‘बट’ परिवार से नाता रखने वाले गामा पहलवान के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह विश्व में एकमात्र ऐसे पहलवान हैं जिन्होंने अपने जीवन में कोई कुश्ती नहीं हारी. 5 फुट 7 इंच के गामा ने विश्व में अपने से लंबे पहलवानों को कई बार पटकनी दी है. उन्होंने 19 साल की उम्र में ‘रहीमबख्श सुल्तानीवाला’ जैसे बड़े पहलवान को हरा दिया था.

अपनी अद्वितीय शक्ति और फुर्ती से रहीमबख्श सुल्तानीवाला को हराने के बाद गामा का नाम विश्व में तेजी से फैल गया. उन्होंने विश्व दंगल में अमेरिका के पहलवान ‘बैंजामिन रोलर’, विश्व विजेता पोलैण्ड के स्टेनली जिबिस्को को हराया. विश्व विजेता स्टेनली जिबिस्को के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह गामा से ज्यादा वजनी होने के बावजूद उनसे डरता था. एक बार कुश्ती के दौरान पोलैंड का यह पहलवान बीच में ही मैदान छोड़कर भाग गया. आयोजकों ने उसे बहुत खोजने की कोशिश की, लेकिन वह कहीं छिप गया था…………………..

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