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सफलता की पहली नीति: आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को हमेशा यह भान होना चाहिए कि अभी कैसा वक्त चल रहा है. अपने सुख और दुःख को देखकर किसी नये कार्य को करने का निर्णय लेना चाहिये. ध्यान रहे कि सुख के दिन हैं तो अच्छा काम करते रहें और यदि दुःख का समय हैं तो अच्छे काम करते हुए  धैर्य बनाये रखें. दुःख के दिनों में अपना धैर्य खोने पर जीवन निरर्थक हो सकता है.